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हमारे दिग्गज 

 

सर गंगा राम 

Sir Ganga Ram,IIT Roorkee

सर गंगा राम  (1873) ने कुछ समय तक पंजाब  लोक निर्माण विभाग में सेवा करने के उपरांत अपने आप को व्यवहारिक कृषि के लिए पूरी तरह से समर्पित कर दिया । उन्होने सरकार से मोन्टगोमरी जिले में 50,000 एकड़ अनुपजाऊ तथा असिंचित भूमि पट्टे पर ली तथा तीन वर्ष के अंदर ही  उस विस्तृत रेगिस्तान को ऐसे हरे भरे खेतों में बदल दिया जिनकी सिंचाई एक जल विद्युत संयंत्र द्वारा उठाए गये व एक हजार मील के सिंचाई चैनल द्वारा आने वाले जल से की जा रही थी ।  यह सब उन्होने अपनी लागत पर निर्मित किया । अपनी तरह का  यह पहला सबसे बड़ा निजी उद्यम था जिसे देश में इससे पहले सोचा तथा जाना नहीं गया था ।

सर गंगा राम ने लाखों कमाए जिसमे से अधिकांश उन्होने दान का दिया । पंजाब के गवर्नर सर मैलकम हेयली के शब्दों में  , " वो एक हीरो की तरह जीते  और उन्होनें एक संत की तरह दिया" वो एक महान इंजीनियर तथा एक महान सममाज सेवी थे ।

 
Raja Jwala Prasad,IIT Roorkee

राजा ज्वाला प्रसाद 

राजा ज्वाला प्रसाद  (1900) जो की एक अन्य अति उद्धरणीय एलुमनस हैं 1929 में उ प्र. सिंचाई विभाग में मुख्य अभियंता बने । तथा सरकार द्वारा राजा की उपाधि से सम्मानित किए गए । 1924 में आपने गंगा नहर ग्रिड योजना तैयार की । 1932 में सेवानिवृत्ति के पश्चात अपने बिजनौर उ .प्र . में एक चीनी मिल तथा एक कृषि फर्म स्थापित की । (1938-39) में आप थॉमसन कालेज पुनर्गठन समिति के अध्यक्ष थे ।  .

 

श्री लक्ष्मीपति मिश्रा 

श्री लक्ष्मीपति मिश्रा  (1911) में एक कुशल इंजीनियर होने के साथ-साथ  अन्य बहुत से गुण थे ।  एक अच्छा खिलाड़ी व एक उत्कृष्ट संवाद कर्ता । आपने अत्यंत विशिष्टता के साथ 34 वर्ष तक भारतीय रेलवे में सेवा की तथा मुख्य आयुक्त के उच्चतम पद तक  पहुंचे । अपने इस पूर्व संस्थान के साथ उनका जुड़ाव अत्यंत घनिष्ठ व अत्यधिक सौहार्द पूर्ण था । 

डा. ए.एन . खोसला 

Dr.A.N.Khosla,IIT Roorkee

डा. ए,एन.खोसला  (1916) एक गतिवान स्वप्न दृष्टा तथा एक उच्च स्तर के इंजीनियर थे । आपने नदियों व  विस्तृत घाटियों के आर-पार परिशुद्ध तल मापन के लिए खोसला डिस्क विकसित की तथा ' पारगम्य नींवों पर बांध की डिजाईन' के  प्रसिद्ध प्रबंध लिखे ।  भाखड़ा नांगल परियोजना के जनक तथा देश की  अन्य अनेकों  नदी घाटी परियोजनाओं के प्रेणा स्रोत डा. खोसला ने केंद्रीय जलमार्ग, सिंचाईं व नौवहन आयोग के अध्यक्ष और बाद में 1954 से 1959 तक विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य किया ।  

डा . खोसला ने विश्वविद्यालय का स्वरूप ही  बदल दिया और इसे भारत के पुनरुथान में अपनी भूमिका अदा करने व उस पर  खरा उतरने की ख्याति प्रदान की ।  ओड़ीसा के राज्यपाल (1962-68) का उच्च पद संभालने वाले वह पहले इंजीनियर थे ।  उन्होने अपनी अधिकांश परामर्श आय खोसला शोध पुरस्कार स्थापित करने हेतु दान दे दी । 

 

डा. घनानन्द पाण्डे 

डा . घनानन्द पाण्डे (1925). भारतीय रेलवे में सेवा प्रारम्भ की ; महा प्रबन्धक के रूप में विशिष्टता अर्जित  की, गंगा पर मोकामा पुल निर्माण;  1956 में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त हुये ।  जब सार्वजनिक क्षेत्र में इस्पात उद्योग स्थापित किया गया तो 1957-60 में अध्यक्ष, हिंदुस्तान स्टील रहे । 1960-61 में बेबी  कार परियोजना के अध्यक्ष के रूप में छोटी कारों के निर्माण की संस्तुति की  । 1961-66 में रुड़की विश्वविद्यालय के कुलपति रहे । .

 

डा . जय कृष्ण

Dr. Jai Krishna, IIT Roorkee
डा . जय कृष्ण  (1935)   संरचनात्मक गति विज्ञान के अध्ययन तथा अनुप्रयोग में अग्रणी रहे व रुड़की विश्वविद्यालय में  भूकंप इंजीनियरी में शोध तथा प्रशिक्षण स्कूल ( जिसे बाद में भूकंप इंजीनियरी विभाग कहा गया ) की स्थापना की । पूरे भारत में, भूकंप सुरक्षित वृहत्त सरंचानाओं की डिजाइन  वाली  अनेकों परियोजनाओं के परामर्श दाता रहे । आपने 1988 में जापान सोसाइटी ऑफ डिजास्टार प्रिवेंशन के अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार,  1988 में सीएसआईआर के  शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, इन्स्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के नेशनल डिजाइन पुरस्कार व पद्म भूषण  सहित  अनेकों पुरस्कार प्राप्त किए । 

 

श्री वेद मित्र मांगलिक 

Sri Ved Mitra Manglik

1940 में उत्तीर्ण होने वालों में श्री वेद मित्र मांगलिक(1940) प्रमुख थे जो उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता के पद तक पहुँचे ।  अपने कार्यकाल के दौरान उन्होने उत्तर प्रदेश में बड़े बांधों की योजना तथा निर्माण एवं बड़ी जल संसाधन परियोजनाओं की ओर  ध्यान आकर्षित  किया ।  1960 के दशक के  मध्य आपने गंगा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के जल विद्युत विकास का एक मास्टर प्लान और कुछ यमुना नदी परियोजनाएं तैयार कीं । अपनी अखंड सत्यनिष्ठा तथा साहस के लिए आपकी बहुत प्रशंसा की  गई ।  आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । एक प्रेरणादायी व करुणामयी नेतृत्व प्रदान करते हुये आपने  2 वर्ष के रिकार्ड समय में एक ऐसी बहुत बड़ी सिंचाईं परियोजना  राम गंगा बांध को  पूरा तथा चालू कर दिखाया  जिसे  बीमार घोषित किया जा चुका था । प्रकृति तथा पौधों के बारे में अपनी गहन रुचि व ज्ञान, और बागवानी के  अपने जुनून व विशेषज्ञता के लिए भी आप विख्यात थे ।  एक बार वरिष्ठ अधिकारियों के एक सम्मेलन में जब सिंचाई विभाग के मंत्री ने आपकी असाधारण प्रभावशीलता का राज पूछा तो आपने उत्तर दिया कि ' मेरे हाथ में लोहे का दंड रहता है परंतु मेरा हृदय गुलाब की पंखुड़ी के समान कोमल है ।'