शिक्षा में वैश्विक स्तर की उत्कृष्टता प्राप्त करना और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में नवाचारी अनुसंधान के माध्यम से एक संधारणीय व न्यायसंगत समाज का निर्माण करना।
एक ऐसे वातावरण का सृजन करना जिससे ऐसे बौद्धिक क्षमता युक्त, नवाचारी तथा उद्यमिता युक्त वृत्तिकों का पोषण हो सके जो उद्योग के साथ सहभागिता से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की वृद्धि में योगदान कर सकें तथा राष्ट्र एवं मानवता के कल्याण हे
शैक्षणिक निष्ठा और जवाबदेही
प्रत्येक व्यक्ति के विचारों के लिए सम्मान और सहिष्णुता
राष्ट्रीय उपयोगिता के साथ-साथ वैश्विक प्रयोजन वाले मुद्दों पर भी ध्यान देना
मानव विज्ञान के ज्ञान सहित समग्र समझ
बौद्धिक उत्कृष्टता और रचनात्मकता की सराहना
अन्वेषण, तर्कसंगतता और उद्यम सीखने की अदम्य भावना
सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशीलता
भा.प्रौ.सं. रुड़की के बारे में
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान - रुड़की उच्च तकनीकी शिक्षा और अभियांत्रिकी, आधारभूत और अनुप्रयुक्त अनुसंधान में राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में अग्रणी है। अपनी स्थापना के बाद से, संस्थान ने देश को तकनीकी जनशक्ति और जानकारी प्रदान करने तथा अनुसंधान के उद्यम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तकनीकी संस्थानों में इस संस्थान का अपना स्थान है और इसने तकनीकी विकास के सभी क्षेत्रों में योगदान किया है। इसे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अभियांत्रिकी जगत में शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र को दिशा देने वाला समझा जाता है।
संस्थान ने अक्टूबर 1996 में अपनी 150वीं वर्षगाँठ मनाई थी और अब अपने अस्तित्व के 175 से अधिक वर्ष पूरे कर लिए हैं। 21 सितंबर, 2001 को भारत सरकार द्वारा जारी एक अध्यादेश द्वारा इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में परिवर्तित कर दिया गया। इसे देश का सातवाँ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान घोषित किया गया, जो कि “राष्ट्रीय महत्व का संस्थान” है।
संस्थान अभियांत्रिकी और वास्तुशिल्प के 10 अनुशासनों में स्नातक उपाधि पाठ्यक्रम और अभियांत्रिकी, अनुप्रयुक्त विज्ञान, वास्तुशिल्प और नियोजन के 55 विषयों में स्नातकोत्तर उपाधि प्रदान करता है। संस्थान में सभी विभागों और अनुसंधान केंद्रों में डॉक्टरेट कार्य की सुविधा है।
संस्थान पूरे भारत में विभिन्न केंद्रों पर आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) के माध्यम से छात्रों को बी.टेक. और बी.आर्क पाठ्यक्रम में प्रवेश देता है।